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सुनन इब्न माजा

नंबर 1301

नंबर 1301किताब 5, नंबर 499
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو تُمَيْلَةَ، عَنْ فُلَيْحِ بْنِ سُلَيْمَانَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْحَارِثِ الزُّرَقِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ إِذَا خَرَجَ إِلَى الْعِيدِ رَجَعَ فِي غَيْرِ الطَّرِيقِ الَّذِي أَخَذَ فِيهِ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that when the Prophet (ﷺ) went out to ‘Eid (prayers), he would return via another route than the first one he took
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।