حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ، عَنْ ضَمْرَةَ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ خَرَجَ عُمَرُ يَوْمَ عِيدٍ فَأَرْسَلَ إِلَى أَبِي وَاقِدٍ اللَّيْثِيِّ بِأَىِّ شَىْءٍ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقْرَأُ فِي مِثْلِ هَذَا الْيَوْمِ؟ قَالَ بِـ {ق} وَاقْتَرَبَتْ .
It was narrated that ‘Ubaidullah bin ‘Abdullah said:“Umar went out on the day of ‘Eid and sent word to Abu Waqid Al-Laithi asking what the Prophet (ﷺ) used to recite on this day. He said: ‘Qaf [Qaf (50)] and ‘Iqtarabat’.” [Al-Qamar]
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।