सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 1226

नंबर 1226किताब 5, नंबर 424
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ، عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ أَبِي هِشَامٍ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقْرَأُ وَهُوَ قَاعِدٌ فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَرْكَعَ قَامَ قَدْرَ مَا يَقْرَأُ إِنْسَانٌ أَرْبَعِينَ آيَةً ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:“The Prophet (ﷺ) used to recite Qur’an sitting down, then when he wanted to bow he would stand up for as long as it takes a person to recite forty Verses.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।