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सुनन इब्न माजा

नंबर 1225

नंबर 1225किताब 5, नंबर 423
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ وَالَّذِي ذَهَبَ بِنَفْسِهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ مَا مَاتَ حَتَّى كَانَ أَكْثَرُ صَلاَتِهِ وَهُوَ جَالِسٌ وَكَانَ أَحَبُّ الأَعْمَالِ إِلَيْهِ الْعَمَلَ الصَّالِحَ الَّذِي يَدُومُ عَلَيْهِ الْعَبْدُ وَإِنْ كَانَ يَسِيرًا ‏.‏
It was narrated that Umm Salamah said:‘By the One Who took his soul (i.e., the soul of the Prophet (ﷺ)), he did not die until he offered most of his prayers sitting down. And the dearest of the actions to him was the righteous action that the person does regularly, even if it were a little.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।