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सुनन इब्न माजा

नंबर 1190

नंबर 1190किताब 5, नंबर 388
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدِّمَشْقِيُّ، حَدَّثَنَا الْفِرْيَابِيُّ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ، عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الأَنْصَارِيِّ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ الْوِتْرُ حَقٌّ. فَمَنْ شَاءَ فَلْيُوتِرْ بِخَمْسٍ. وَمَنْ شَاءَ فَلْيُوتِرْ بِثَلاَثٍ. وَمَنْ شَاءَ فَلْيُوتِرْ بِوَاحِدَةٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Ayyub Al-Ansari that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Witr is Haqq.* Whoever wishes let him pray Witr with five (Rak’ah), and whoever wishes let him pray Witr with three (Rak’ah), and whoever wishes let him pray Witr with one (Rak’ah).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।