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सुनन इब्न माजा

नंबर 1166

नंबर 1166किताब 5, नंबर 364
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الأَزْهَرِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ وَاقِدٍ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُؤَمَّلِ بْنِ الصَّبَّاحِ، حَدَّثَنَا بَدَلُ بْنُ الْمُحَبَّرِ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا عَاصِمُ بْنُ بَهْدَلَةَ، عَنْ زِرٍّ، وَأَبِي، وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَقْرَأُ فِي الرَّكْعَتَيْنِ بَعْدَ صَلاَةِ الْمَغْرِبِ ‏{قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ‏}‏ وَ ‏{قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ }‏ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Abdullah bin Mas’ud that for the two Rak’ah after Maghrib, the Prophet (ﷺ) used to recite:“Say: O you disbelievers!” [Al-Kafirun (109)] and “Say: He is Allah the One.” [Al- Ikhlas]
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।