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सुनन इब्न माजा

नंबर 1165

नंबर 1165किताब 5, नंबर 363
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ الضَّحَّاكِ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ بْنِ قَتَادَةَ، عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ، عَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ، قَالَ أَتَانَا رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي بَنِي عَبْدِ الأَشْهَلِ فَصَلَّى بِنَا الْمَغْرِبَ فِي مَسْجِدِنَا ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ ارْكَعُوا هَاتَيْنِ الرَّكْعَتَيْنِ فِي بُيُوتِكُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Rafi’ bin Khadij said:“We came to the Messenger of Allah (ﷺ) with Banu ‘Abdul-Ashhal, and he led us in praying the Maghrib in our mosque. Then he said: ‘Pray these two Rak’ah in your houses.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।