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सुनन इब्न माजा

नंबर 1080

नंबर 1080किताब 5, नंबर 278
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدِّمَشْقِيُّ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، عَنْ عَمْرِو بْنِ سَعْدٍ، عَنْ يَزِيدَ الرَّقَاشِيِّ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ لَيْسَ بَيْنَ الْعَبْدِ وَالشِّرْكِ إِلاَّ تَرْكُ الصَّلاَةِ، فَإِذَا تَرَكَهَا فَقَدْ أَشْرَكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Anas bin Malik that the Prophet (ﷺ) said:“There is nothing standing between a person and Shirk (polytheism) except leaving the prayer, so if he leaves it he has committed Shirk.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।