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सुनन इब्न माजा

नंबर 1068

नंबर 1068किताब 5, नंबर 266
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ، وَجُبَارَةُ بْنُ الْمُغَلِّسِ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ الأَخْنَسِ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ: افْتَرَضَ اللَّهُ الصَّلاَةَ عَلَى لِسَانِ نَبِيِّكُمْ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي الْحَضَرِ أَرْبَعًا وَفِي السَّفَرِ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Abbas said:“Allah enjoined the prayer upon the tongue of your Prophet (ﷺ): Four Rak’ah while a resident and two Rak’ah when traveling.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।