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सुनन इब्न माजा

नंबर 1067

नंबर 1067किताब 5, नंबर 265
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ، أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ بِشْرِ بْنِ حَرْبٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِذَا خَرَجَ مِنْ هَذِهِ الْمَدِينَةِ لَمْ يَزِدْ عَلَى رَكْعَتَيْنِ، حَتَّى يَرْجِعَ إِلَيْهَا ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Umar said:“When the Messenger of Allah (ﷺ) went out from this city (Al-Madinah) he did not perform more than two Rak’ah for prayer until he returned.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।