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सुनन इब्न माजा

नंबर 1031

नंबर 1031किताब 5, नंबर 229
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ الدَّرَاوَرْدِيُّ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي حَبِيبَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ جَاءَنَا النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَصَلَّى بِنَا فِي مَسْجِدِ بَنِي عَبْدِ الأَشْهَلِ فَرَأَيْتُهُ وَاضِعًا يَدَيْهِ عَلَى ثَوْبِهِ إِذَا سَجَدَ ‏.‏
It was narrated that ‘Abdullah bin ‘Abdur-Rahman said:“The Prophet (ﷺ) came to us and led us in prayer in the mosque of Banu ‘Abdul- Ashhal, and I saw him putting his hands on his garment when he prostrated.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।