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सुनन इब्न माजा

नंबर 4290

नंबर 4290किताब 37, नंबर 191
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ إِيَاسٍ الْجُرَيْرِيِّ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ نَحْنُ آخِرُ الأُمَمِ وَأَوَّلُ مَنْ يُحَاسَبُ يُقَالُ أَيْنَ الأُمَّةُ الأُمِّيَّةُ وَنَبِيُّهَا فَنَحْنُ الآخِرُونَ الأَوَّلُونَ ‏"‏ ‏.‏
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "हम अंतिम उम्मत हैं, और सबसे पहले हमारा हिसाब-किताब होगा। कहा जाएगा : कहाँ है उम्मी उम्मत और उसके नबी? तो हम ही सबसे अंतिम और सबसे पहले हैं।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।