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सुनन इब्न माजा

नंबर 4289

नंबर 4289किताब 37, नंबर 190
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِسْحَاقَ الْجَوْهَرِيُّ، حَدَّثَنَا حُسَيْنُ بْنُ حَفْصٍ الأَصْبَهَانِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ أَهْلُ الْجَنَّةِ عِشْرُونَ وَمِائَةُ صَفٍّ ثَمَانُونَ مِنْ هَذِهِ الأُمَّةِ وَأَرْبَعُونَ مِنْ سَائِرِ الأُمَمِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Sulaiman bin Buraidah, from his father, that the Prophet (ﷺ) said:“The people of Paradise are one hundred and twenty ranks, eighty from this nation and forty from all other nations.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।