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सुनन इब्न माजा

नंबर 4279

नंबर 4279किताब 37, नंबर 180
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، عَنْ دَاوُدَ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنْ قَوْلِهِ ‏{يَوْمَ تُبَدَّلُ الأَرْضُ غَيْرَ الأَرْضِ وَالسَّمَوَاتُ ‏}‏ فَأَيْنَ تَكُونُ النَّاسُ يَوْمَئِذٍ قَالَ ‏"‏ عَلَى الصِّرَاطِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:“I asked the Messenger of Allah (ﷺ): “On the Day when the earth will be changed to another earth and so will be the heavens.” [14:48] – where will the people be on that Day?’ He said: ‘On the Sirat (the Bridge across Hell-fire).’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।