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सुनन इब्न माजा

नंबर 4278

नंबर 4278किताब 37, नंबर 179
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، وَأَبُو خَالِدٍ الأَحْمَرُ عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏{يَوْمَ يَقُومُ النَّاسُ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ}‏ قَالَ ‏"‏ يَقُومُ أَحَدُهُمْ فِي رَشْحِهِ إِلَى أَنْصَافِ أُذُنَيْهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn ‘Umar that the Prophet (ﷺ) said:“The Day when (all) mankind will stand before the Lord of all that exists.” [83:6] One of them will stand in his sweat up to halfway up his ears.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।