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सुनन इब्न माजा

नंबर 4253

नंबर 4253किताब 37, नंबर 154
حَدَّثَنَا رَاشِدُ بْنُ سَعِيدٍ الرَّمْلِيُّ، أَنْبَأَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنِ ابْنِ ثَوْبَانَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ مَكْحُولٍ، عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ لَيَقْبَلُ تَوْبَةَ الْعَبْدِ مَا لَمْ يُغَرْغِرْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Abdullah bin ‘Amr that the Prophet (ﷺ) said:“Allah accepts the repentance of His slave so long as the death rattle has not yet reached his throat.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।