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सुनन इब्न माजा

नंबर 4233

नंबर 4233किताब 37, नंबर 134
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ، ‏:‏ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ قَلْبُ الشَّيْخِ شَابٌّ فِي اثْنَتَيْنِ ‏:‏ فِي حُبِّ الْحَيَاةِ وَكَثْرَةِ الْمَالِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“The heart of an old man is young in the love of two things: Love of life and much wealth.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।