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सुनन इब्न माजा

नंबर 4232

नंबर 4232किताब 37, नंबर 133
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏:‏ ‏"‏ هَذَا ابْنُ آدَمَ وَهَذَا أَجَلُهُ عِنْدَ قَفَاهُ ‏"‏ ‏.‏ وَبَسَطَ يَدَهُ أَمَامَهُ ثُمَّ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ وَثَمَّ أَمَلُهُ ‏"‏ ‏.‏
Anas bin Malik narrated the Messenger of Allah (ﷺ) said:“This is the son of Adam, and this is his life span at his neck,’ then he spread his hand in front of him and said: ‘And there is his hope.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।