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सुनन इब्न माजा

नंबर 4226

नंबर 4226किताब 37, नंबर 127
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ سِنَانٍ أَبُو سِنَانٍ الشَّيْبَانِيُّ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَجُلٌ ‏:‏ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أَعْمَلُ الْعَمَلَ فَيُطَّلَعُ عَلَيْهِ فَيُعْجِبُنِي قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ لَكَ أَجْرَانِ ‏:‏ أَجْرُ السِّرِّ وَأَجْرُ الْعَلاَنِيَةِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:“A man said: ‘O Messenger of Allah, I do a good deed, then others find out about it and that pleases me.’ He said: ‘You will have two rewards, the reward for doing it in secret and the reward for doing it openly (so that others may follow your example).’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।