सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 4225

नंबर 4225किताब 37, नंबर 126
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي عِمْرَانَ الْجَوْنِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الصَّامِتِ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ قُلْتُ لَهُ ‏:‏ الرَّجُلُ يَعْمَلُ الْعَمَلَ لِلَّهِ فَيُحِبُّهُ النَّاسُ عَلَيْهِ قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ ذَلِكَ عَاجِلُ بُشْرَى الْمُؤْمِنِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Dharr:“I said to the Prophet (ﷺ): ‘(What do you say about when) a man does a deed for the sake of Allah, and people love him for it?’ He said: ‘That is the immediate glad tidings of the believer.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।