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सुनन इब्न माजा

नंबर 4059

नंबर 4059किताब 36, नंबर 134
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ، حَدَّثَنَا بَشِيرُ بْنُ سَلْمَانَ، عَنْ سَيَّارٍ، عَنْ طَارِقٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ بَيْنَ يَدَىِ السَّاعَةِ مَسْخٌ وَخَسْفٌ وَقَذْفٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Abdullah that the Prophet (ﷺ) said:“Just before the Hour comes there will be transformations, the earth collapsing, and Qadhf. (i.e. the throwing of stones perhaps as a means of punishment – maybe it refers to landslides).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Tribulations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।