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सुनन इब्न माजा

नंबर 3949

नंबर 3949किताब 36, नंबर 24
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ الرَّبِيعِ الْيُحْمِدِيُّ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ كَثِيرٍ الشَّامِيِّ، عَنِ امْرَأَةٍ، مِنْهُمْ يُقَالَ لَهَا فُسَيْلَةُ قَالَتْ سَمِعْتُ أَبِي يَقُولُ، سَأَلْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَمِنَ الْعَصَبِيَّةِ أَنْ يُحِبَّ الرَّجُلُ قَوْمَهُ قَالَ ‏ "‏ لاَ وَلَكِنْ مِنَ الْعَصَبِيَّةِ أَنْ يُعِينَ الرَّجُلُ قَوْمَهُ عَلَى الظُّلْمِ ‏"‏ ‏.‏
‘Abbad bin Kathir Ash-Shami narrated from a woman among them, called Fasilah, that she heard her father say:“I asked the Prophet (ﷺ): ‘O Messenger of Allah, is it tribalism if a man loves his people?’ He said: ‘No, rather tribalism is when a man helps his people to do wrong.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Tribulations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।