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सुनन इब्न माजा

नंबर 3863

नंबर 3863किताब 34, नंबर 37
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ، حَدَّثَتْنَا حَبَابَةُ ابْنَةُ عَجْلاَنَ، عَنْ أُمِّهَا أُمِّ حَفْصٍ، عَنْ صَفِيَّةَ بِنْتِ جَرِيرٍ، عَنْ أُمِّ حَكِيمٍ بِنْتِ وَدَاعٍ الْخُزَاعِيَّةِ، قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ ‏ "‏ دُعَاءُ الْوَالِدِ يُفْضِي إِلَى الْحِجَابِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Umm Haim bint Wadda' Al-Khuza'iyyah said:"I heard the Messenger of Allah (saas) say: 'The supplication of a father reaches the Veil (i.e. the place of repentance)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।