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सुनन इब्न माजा

नंबर 3805

नंबर 3805किताब 33, नंबर 149
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَلاَّلُ، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنْ شَبِيبِ بْنِ بِشْرٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ مَا أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَى عَبْدٍ نِعْمَةً فَقَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ ‏.‏ إِلاَّ كَانَ الَّذِي أَعْطَاهُ أَفْضَلَ مِمَّا أَخَذَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Anas that :the Messenger of Allah (ﷺ) said: 'Allah does not bestow a blessing upon any slave and he says: 'Al-hamdu Lillah (praise is to Allah),' except that what he gives (the praise) is better than what he received (the blessing)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।