حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ نُعَيْمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْمُجْمِرِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ طِخْفَةَ الْغِفَارِيِّ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، قَالَ مَرَّ بِيَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَأَنَا مُضْطَجِعٌ عَلَى بَطْنِي فَرَكَضَنِي بِرِجْلِهِ وَقَالَ " يَا جُنَيْدِبُ إِنَّمَا هَذِهِ ضِجْعَةُ أَهْلِ النَّارِ " .
It was narrated that Abu Dharr said:"The Prophet(ﷺ) passed by me and I was lying on my stomach. He nudged me with his foot and said: 'O Junaidib! This is how the people of Hell lie
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।