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सुनन इब्न माजा

नंबर 3067

नंबर 3067किताब 25, नंबर 186
حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي زَائِدَةَ، وَعَبْدَةُ، وَوَكِيعٌ، وَأَبُو مُعَاوِيَةَ ح وَحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، وَأَبُو مُعَاوِيَةَ ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، كُلُّهُمْ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ إِنَّ نُزُولَ الأَبْطَحِ لَيْسَ بِسُنَّةٍ إِنَّمَا نَزَلَهُ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ لِيَكُونَ أَسْمَحَ لِخُرُوجِهِ ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:“Staying in Abtah is not Sunnah; the Messenger of Allah (ﷺ) only stayed there because it was more convenient for his departure.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।