सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 3065

नंबर 3065किताब 25, नंबर 184
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ اسْتَأْذَنَ الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنْ يَبِيتَ بِمَكَّةَ أَيَّامَ مِنًى مِنْ أَجْلِ سِقَايَتِهِ فَأَذِنَ لَهُ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Umar said:“Abbas bin ‘Abdul-Muttalib asked the Messenger of Allah (ﷺ) for permission to stay overnight in Makkah on the nights of Mina for the purpose of supplying water to the pilgrims, and he gave him permission
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।