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सुनन इब्न माजा

नंबर 2989

नंबर 2989किताब 25, नंबर 108
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ يَحْيَى الْخُشَنِيُّ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ قَيْسٍ، أَخْبَرَنِي طَلْحَةُ بْنُ يَحْيَى، عَنْ عَمِّهِ، إِسْحَاقَ بْنِ طَلْحَةَ عَنْ طَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ ‏ "‏ الْحَجُّ جِهَادٌ وَالْعُمْرَةُ تَطَوُّعٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Talhah bin ‘Ubaidullah that he heard the Messenger of Allah (ﷺ) say:“Hajj is Jihad and ‘Umrah is voluntary.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Very DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।