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सुनन इब्न माजा

नंबर 2885

नंबर 2885किताब 25, नंबर 4
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي عُبَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ الْحَجُّ فِي كُلِّ عَامٍ قَالَ ‏ "‏ لَوْ قُلْتُ نَعَمْ لَوَجَبَتْ وَلَوْ وَجَبَتْ لَمْ تَقُومُوا بِهَا وَلَوْ لَمْ تَقُومُوا بِهَا عُذِّبْتُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said:“They said: ‘O Messenger of Allah, is Hajj (required) every year?’ He said: ‘If I were to say yes, it would have become obligatory, and if it were to become obligatory, you would not (be able to) do it, and if you did not do it you would be punished.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।