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सुनन इब्न माजा

नंबर 2829

नंबर 2829किताब 24, नंबर 77
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ، عَنِ ابْنِ لَهِيعَةَ، أَخْبَرَنِي يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ لَهِيعَةَ بْنِ عُقْبَةَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الْوَرْدِ، صَاحِبَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ إِيَّاكُمْ وَالسَّرِيَّةَ الَّتِي إِنْ لَقِيَتْ فَرَّتْ وَإِنْ غَنِمَتْ غَلَّتْ ‏.‏
It was narrated that Lahi’ah bin ‘Uqbah said:“I heard Abul-Ward, the Companion of the Messenger of Allah (ﷺ), say: ‘Beware of the troop which, when it meets (the enemy) it flees, and when it takes spoils of war, it steals from it.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • Daif IsnaadMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Chapters on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।