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सुनन इब्न माजा

नंबर 2826

नंबर 2826किताब 24, नंबर 74
حَدَّثَنَا عَبَّادُ بْنُ الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا حَبَّانُ بْنُ هِلاَلٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مِحْصَنٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَشْخَصَ السَّرَايَا يَقُولُ لِلشَّاخِصِ ‏ "‏ أَسْتَوْدِعُ اللَّهَ دِينَكَ وَأَمَانَتَكَ وَخَوَاتِيمَ عَمَلِكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Umar said:“When the Messenger of Allah (ﷺ) would dispatch troops, he would say to the leader: ‘I commend to Allah’s keeping your religious commitment, your dignity and the end of your deeds.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Chapters on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।