सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 2825

नंबर 2825किताब 24, नंबर 73
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنِ الْحَسَنِ بْنِ ثَوْبَانَ، عَنْ مُوسَى بْنِ وَرْدَانَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ وَدَّعَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ أَسْتَوْدِعُكَ اللَّهَ الَّذِي لاَ تَضِيعُ وَدَائِعُهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) gave me a send-off and said: ‘I command you to Allah’s keeping, Whose trust is never lost.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Chapters on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।