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सुनन इब्न माजा

नंबर 2632

नंबर 2632किताब 21, नंबर 18
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سِنَانٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم جَعَلَ الدِّيَةَ اثْنَىْ عَشَرَ أَلْفًا قَالَ ذَلِكَ قَوْلُهُ ‏{وَمَا نَقَمُوا إِلاَّ أَنْ أَغْنَاهُمُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ مِنْ فَضْلِهِ}‏ قَالَ بِأَخْذِهِمُ الدِّيَةَ ‏.‏
It was narrated from 'Ikrimah, from Ibn 'Abbas, that :the Prophet (ﷺ) set the blood money at twelve thousand (Dirham). He said: “This is what Allah says: 'And they could not find any cause to do so except that Allah and his Messenger (ﷺ) had enriched them of His bounty.'” He said: “By their taking the blood money.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Chapters on Blood Money

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।