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सुनन इब्न माजा

नंबर 2601

नंबर 2601किताब 20, नंबर 69
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَشَجِّ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ بْنِ نِيَارٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يُجْلَدُ أَحَدٌ فَوْقَ عَشْرِ جَلَدَاتٍ إِلاَّ فِي حَدٍّ مِنْ حُدُودِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Burdah bin Niyar that the Messenger of Allah (ﷺ) used to say:“No one should be given more than ten lashes, except in the case of one of the legal punishments of Allah (SWT).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Chapters on Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।