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सुनन इब्न माजा

नंबर 2599

नंबर 2599किताब 20, नंबर 67
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، ح وَحَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَرَفَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو حَفْصٍ الأَبَّارُ، جَمِيعًا عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ مُسْلِمٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تُقَامُ الْحُدُودُ فِي الْمَسَاجِدِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn Abbas that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Do not carry out the legal punishment in the mosque.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Chapters on Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।