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सुनन इब्न माजा

नंबर 2566

नंबर 2566किताब 20, नंबर 34
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عَمَّارِ بْنِ أَبِي فَرْوَةَ، أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ مُسْلِمٍ، حَدَّثَهُ أَنَّ عُرْوَةَ حَدَّثَهُ أَنَّ عَمْرَةَ بِنْتَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَتْهُ أَنَّ عَائِشَةَ حَدَّثَتْهَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا زَنَتِ الأَمَةُ فَاجْلِدُوهَا فَإِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا فَإِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا فَإِنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا ثُمَّ بِيعُوهَا وَلَوْ بِضَفِيرٍ ‏"‏ ‏.‏ وَالضَّفِيرُ الْحَبْلُ ‏.‏
Aishah narrated that the Messenger of Allah(ﷺ) said:“If a slave woman commits fornication then whip her, and if she commits fornication then whip her, and if she commits fornication then whip her, then sell her even if that is for a rope.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Chapters on Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।