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सुनन इब्न माजा

नंबर 2537

नंबर 2537किताब 20, नंबर 5
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ سِنَانٍ، عَنْ أَبِي الزَّاهِرِيَّةِ، عَنْ أَبِي شَجَرَةَ، كَثِيرِ بْنِ مُرَّةَ عَنِ ابِنْ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِقَامَةُ حَدٍّ مِنْ حُدُودِ اللَّهِ خَيْرٌ مِنْ مَطَرِ أَرْبَعِينَ لَيْلَةً فِي بِلاَدِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn `Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Carrying out one of the legal punishments prescribed by Allah (SWT) is better than if it were to rain for forty nights in the land of Allah (SWT), Glorified is He.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Very DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Chapters on Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।