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सुनन इब्न माजा

नंबर 2404

नंबर 2404किताब 15, नंबर 15
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ تَوْبَةَ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ يُونُسَ بْنِ عُبَيْدٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَطْلُ الْغَنِيِّ ظُلْمٌ وَإِذَا أُحِلْتَ عَلَى مَلِيءٍ فَاتْبَعْهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“When a rich man takes too long to repay a debt, this is wrongdoing, and if the debt is transferred to a rich man, you should accept if.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih HadithAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Chapters on Charity

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।