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सुनन इब्न माजा

नंबर 2387

नंबर 2387किताब 14, नंबर 13
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ بْنِ مُجَمِّعِ بْنِ جَارِيَةَ الأَنْصَارِيُّ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الرَّجُلُ أَحَقُّ بِهِبَتِهِ مَا لَمْ يُثَبْ مِنْهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“A man has more right to his gift so long as he has not gotten something in return for it.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Chapters on Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।