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सुनन इब्न माजा

नंबर 2383

नंबर 2383किताब 14, नंबर 9
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، ح وَحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، قَالاَ حَدَّثَنَا دَاوُدُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْعُمْرَى جَائِزَةٌ لِمَنْ أُعْمِرَهَا وَالرُّقْبَى جَائِزَةٌ لِمَنْ أُرْقِبَهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Jabir bin 'Abdullah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Umra belongs to the one to whom it is given, and Ruqba belongs to the one to whom it is given.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Chapters on Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।