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सुनन इब्न माजा

नंबर 2382

नंबर 2382किताब 14, नंबर 8
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَنْبَأَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ رُقْبَى فَمَنْ أُرْقِبَ شَيْئًا فَهُوَ لَهُ حَيَاتَهُ وَمَمَاتَهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَالرُّقْبَى أَنْ يَقُولَ هُوَ لِلآخَرِ مِنِّي وَمِنْكَ مَوْتًا ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“There is no Ruqba. Whoever is given a gift on the basis of Ruqba, it belongs to him, whether he lives or dies.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Chapters on Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।