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सुनन इब्न माजा

नंबर 2371

नंबर 2371किताब 13, नंबर 64
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أَنْبَأَنَا جُوَيْرِيَةُ بْنُ أَسْمَاءَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ، - مَوْلَى الْمُنْبَعِثِ - عَنْ رَجُلٍ، مِنْ أَهْلِ مِصْرَ عَنْ سُرَّقٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَجَازَ شَهَادَةَ الرَّجُلِ وَيَمِينَ الطَّالِبِ ‏.‏
It was narrated from Surraq that :the Prophet (ﷺ) allowed the testimony of a man along with the oath of the claimant
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Chapters on Rulings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।