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सुनन इब्न माजा

नंबर 2320

नंबर 2320किताब 13, नंबर 13
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ ثَعْلَبَةَ بْنِ سَوَاءٍ، حَدَّثَنِي عَمِّي، مُحَمَّدُ بْنُ سَوَاءٍ عَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ، عَنْ مَطَرٍ الْوَرَّاقِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَعَانَ عَلَى خُصُومَةٍ بِظُلْمٍ - أَوْ يُعِينُ عَلَى ظُلْمٍ - لَمْ يَزَلْ فِي سَخَطِ اللَّهِ حَتَّى يَنْزِعَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Whoever takes the wrongdoer's side in a dispute or supports wrongdoing, he will remain subject to the wrath of Allah until he gives it up.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Chapters on Rulings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।