حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي الْجَهْمِ بْنِ صُخَيْرٍ الْعَدَوِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ فَاطِمَةَ بِنْتَ قَيْسٍ، تَقُولُ إِنَّ زَوْجَهَا طَلَّقَهَا ثَلاَثًا فَلَمْ يَجْعَلْ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ سُكْنَى وَلاَ نَفَقَةً .
It was narrated that Abu Bakr bin Abu Jahm bin Sukhair Al-'Adawi said:"I heard Fatimah bint Qais say that her husband divorced her ttree times, and the Messenger of Allah (ﷺ) did not say that she was entitled to accommodation and maintenance
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।