حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا شُجَاعُ بْنُ الْوَلِيدِ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَبْدِ الأَعْلَى، عَنْ أَبِي سَهْلٍ، عَنْ مُسَّةَ الأَزْدِيَّةِ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ كَانَتِ النُّفَسَاءُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ تَجْلِسُ أَرْبَعِينَ يَوْمًا وَكُنَّا نَطْلِي وُجُوهَنَا بِالْوَرْسِ مِنَ الْكَلَفِ .
It was narrated that Umm Salamah said:"At the time of the Messenger of Allah, women in postnatal bleeding (after childbirth) used to wait for forty days, and we used to put Wars on our faces because of freckles
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan SahihAl-Albani
Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Hasan LighairihiShuaib Al Arnaut
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।