सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 335

नंबर 335किताब 1, नंबर 69
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، أَنْبَأَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي سَفَرٍ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ لاَ يَأْتِي الْبَرَازَ حَتَّى يَتَغَيَّبَ فَلاَ يُرَى ‏.‏
It was narrated that Jabir said:"We went out on a journey with the Messenger of Allah, and the Messenger of Allah would not relieve himself until he had disappeared and could not be seen by anyone
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Purification and its Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।