सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 263

नंबर 263किताब 0, नंबर 263
حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ أَبِي السَّرِيِّ الْعَسْقَلاَنِيُّ، حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ تَمِيمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ السَّرِيِّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِذَا لَعَنَ آخِرُ هَذِهِ الأُمَّةِ أَوَّلَهَا فَمَنْ كَتَمَ حَدِيثًا فَقَدْ كَتَمَ مَا أَنْزَلَ اللَّهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Jabir said:"The Messenger of Allah said: 'When the last people of this Ummah curse the first, (at that time) whoever conceals a Hadith will be concealing what Allah has revealed.'" (Maudu)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Very DaifAl-Albani
  • Very DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Very DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।