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सुनन इब्न माजा

नंबर 132

नंबर 132किताब 0, नंबर 132
حَدَّثَنَا مَسْرُوقُ بْنُ الْمَرْزُبَانِ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي زَائِدَةَ، عَنْ هَاشِمِ بْنِ هَاشِمٍ، قَالَ سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، يَقُولُ قَالَ سَعْدُ بْنُ أَبِي وَقَّاصٍ مَا أَسْلَمَ أَحَدٌ فِي الْيَوْمِ الَّذِي أَسْلَمْتُ فِيهِ وَلَقَدْ مَكَثْتُ سَبْعَةَ أَيَّامٍ وَإِنِّي لَثُلُثُ الإِسْلاَمِ ‏.‏
It was narrated that Hashim bin Hashim said:"I heard Sa'eed bin Musayyab say: 'Sa'd bin Abu Waqqas said: 'No one else became Muslim on the same day as I did; for seven days I was one-third of Islam
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।