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सुनन इब्न माजा

नंबर 124

नंबर 124किताब 0, नंबर 124
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، وَهَدِيَّةُ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَتْ لِي عَائِشَةُ يَا عُرْوَةُ كَانَ أَبَوَاكَ مِنَ الَّذِينَ اسْتَجَابُوا لِلَّهِ وَالرَّسُولِ مِنْ بَعْدِ مَا أَصَابَهُمُ الْقَرْحُ أَبُو بَكْرٍ وَالزُّبَيْرُ ‏.‏
It was narrated from Hisham bin 'Urwah that his father said:''Aishah said to me: 'O 'Urwah, your two fathers were of those who answered (the Call of) Allah and the Messenger (Muhammed) after being wounded," (they were) Abu Bakr and Zubair
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।