عن ابن عباس رضي الله عنهما قال: كُنْتُ خَلْفَ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا، فَقَالَ: «يَا غُلَامُ، إِنِّي أُعَلِّمُكَ كَلِمَاتٍ، احْفَظِ اللهَ يَحْفَظْكَ، احْفَظِ اللهَ تَجِدْهُ تُجَاهَكَ، إِذَا سَأَلْتَ فَاسْأَلِ اللهَ، وَإِذَا اسْتَعَنْتَ فَاسْتَعِنْ بِاللهِ، وَاعْلَمْ أَنَّ الْأُمَّةَ لَوِ اجْتَمَعَتْ عَلَى أَنْ يَنْفَعُوكَ بِشَيْءٍ، لَمْ يَنْفَعُوكَ إِلَّا بِشَيْءٍ قَدْ كَتَبَهُ اللهُ لَكَ، وَلَوِ اجْتَمَعُوا عَلَى أَنْ يَضُرُّوكَ بِشَيْءٍ، لَمْ يَضُرُّوكَ إِلَّا بِشَيْءٍ قَدْ كَتَبَهُ اللهُ عَلَيْكَ، رُفِعَتِ الْأَقْلَامُ وَجَفَّتِ الصُّحُفُ».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, उन्होंने कहा : मैं एक दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पीछे सवार था कि इसी बीच आपने कहा : "ऐ बच्चे! मैं तुम्हें कुछ बातें सिखाना चाहता हूँ। अल्लाह (के आदेशों और निषेधों) की रक्षा करो, अल्लाह तुम्हारी रक्षा करेगा। अल्लाह (के आदेशों और निषेधों) की रक्षा करो, तुम उसे अपने सामने पाओगे। जब माँगो, तो अल्लाह से माँगो और जब मदद तलब करो, तो अल्लाह से तलब करो। तथा जान लो, यदि पूरी उम्मत तुम्हें कुछ लाभ पहुँचाने के लिए एकत्र हो जाए, तो तुम्हें उससे अधिक लाभ नहीं पहुँचा सकती, जितना अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है। तथा यदि सब लोग तुम्हारी कुछ हानि करने के लिए एकत्र हो जाएँ, तो उससे अधिक हानि नहीं कर सकते, जितनी अल्लाह ने तुम्हारे भाग्य में लिखा है। क़लम उठा ली गई है और पुस्तकें सूख चुकी हैं।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा बता रहे हैं कि वह छोटे थे और एक दिन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पीछे सवारी पर बैठे हुए थे कि आपने कहा : मैं तुम्हें कुछ बातें सिखाऊँगा, जिनसे अल्लाह तुम्हें फ़ायदा पहुँचाएगा :
अल्लाह के आदेशों की रक्षा करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहकर इस तरह अल्लाह की रक्षा करो कि वह तुमको नेकी और अल्लाह से निकट करने वाले कामों में पाए, अवज्ञाकारियों और गुनाहों में न पाए। अगर तुम ऐसा करोगे, तो बदले में अल्लाह दुनिया एवं आख़िरत की अप्रिय चीज़ों से तुम्हारी रक्षा करेगा और तुम जहाँ भी जाओगे, हर काम में तुम्हारी मदद करेगा।
जब कुछ माँगना हो, तो केवल अल्लाह से माँगो। क्योंकि वही माँगने वालों की मुरादें पूरी करता है।
जब मदद तलब करनी हो, तो केवल अल्लाह से तलब करो।
तुम्हारे दिल में इस बात का विश्वास होना चाहिए कि अगर धरती के ऊपर मौजूद सारे लोग तुम्हारा भला करना चाहें, तो उतना ही कर सकते हैं, जितना अल्लाह ने तुम्हारे भाग्य में लिख रखा है और धरती पर बसने वाले सारे लोग तुम्हारा बुरा करना चाहें, तो उससे ज़्यादा नहीं कर सकते, जितना अल्लाह ने तुम्हारे भाग्य में लिख रखा है।
इन सारी बातों को अल्लाह ने अपनी हिकमत तथा ज्ञान के तक़ाज़े के अनुसार लिख रखा है और अल्लाह के लिखे में कोई बदलाव संभव नहीं है।
फ़ायदे
- छोटे बच्चों को तौहीद तथा आदाब एवं इस प्रकार की दीन की अन्य बातें सिखाने का महत्व।
- अल्लाह बंदे को प्रतिफल उसी कोटि का देता है, जिस कोटि का उसका अमल रहता है।
- केवल अल्लाह पर भरोसा करने का आदेश, क्योंकि वही काम बनाने वाला है।
- अल्लाह के निर्णय तथा तक़दीर पर ईमान और उससे राज़ी रहना तथा इस बात का उल्लेख कि अल्लाह ने सारी चीज़ों का निर्णय पहले से ले रखा है।
- जो अल्लाह के आदेशों को नष्ट करेगा, अल्लाह उसे नष्ट कर देगा और उसकी रक्षा नहीं करेगा।
हवाला
سنن الترمذي (4/ 284) (2516).
التحفة الربانية في شرح الأربعين حديثًا النووية (ص42).
شرح الأربعين النووية، لابن عثيمين (ص200).
فتح القوي المتين في شرح الأربعين وتتمة الخمسين، للعباد (ص69).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبادة بن الصامت رضي الله عنه قال: يا بُنَيَّ، إنك لن تجد طعم الإيمان حتى تعلم أن ما أصابك لم يكن ليخطئك، وما أخطأك لم يكن ليصيبك، سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «إن أول ما خلق الله القلم، فقال له: اكتب. فقال: رب، وماذا أكتب؟ قال: اكتب مقادير كل شيء حتى تقوم الساعة». يا بني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «من مات على غير هذا فليس مني».
وفي رواية لأحمد: «إن أول ما خلق الله تعالى القلم، فقال له: اكتب، فجرى في تلك الساعة بما هو كائن إلى يوم القيامة».
وفي رواية لابن وهب قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «فمن لم يؤمن بالقدر خيره وشره أحرقه الله بالنار».
उबादा बिन सामित (रज़ियल्लाहु अंहु) से रिवायत है कि उन्होंने कहाः ऐ मेरे बेटे! तुम उस समय तक ईमान की मिठास महसूस नहीं कर सकते, जब तक इस बात का विश्वास न रखो कि जो कुछ तुम्हें पहुँचने वाला है, वह तुमसे टल नहीं सकता और जो कुछ तुम्हें नहीं पहुँचने वाला है, वह तुम्हें पहुँच नहीं सकता। मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते सुना हैः अल्लाह ने सबसे पहले क़लम को पैदा किया। फिर उसे लिखने का आदेश दिया तो उसने कहाः ऐ मेरे रब! मैं क्या लिखूँ? अल्लाह ने कहाः क़यामत तक पैदा होने वाली सारी चीज़ों की तक़दीर लिखो। ऐ मेरे बेटे! मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते सुना हैः जो व्यक्ति इस विश्वास के बिना मरा, वह मेरी उम्मत में से नहीं है।
तथा अहमद की एक रिवायत में हैः अल्लाह ने सबसे पहले क़लम को पैदा किया और उसे लिखने को कहा तो वह उसी क्षण क़यामत तक होने वाली सारी घटनाओं को लिखने में लग गई।
तथा इब्ने बह्ब की एक रिवायत में है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जो व्यक्ति भली-बुरी तक़दीर पर ईमान नहीं लाएगा, अल्लाह उसे आग में जलाएगा।
इसे इब्ने वह्ब ने 'अल्-क़दर' में रिवायत किया है। - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
उबादा बिन सामित -रज़ियल्लाहु अंहु- ने अपने बेटे वलीद को वसीयत की है कि भली-बुरी तक़दीर पर विश्वास रखे, तथा यह स्पष्ट किया है कि दुनिया एवं आख़िरत में तक़दीर पर ईमान के क्या कुछ अच्छे परिणाम एवं उसे न मानने के क्या कुछ बुरे परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने अपनी बात के प्रमाण के तौर पर रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की एक हदीस पेश की है, जो यह बताती है अल्लाह ने सृष्टियों को पैदा करने से पहले ही तक़दीरों का निर्धारण कर दिया था तथा क़लम को उन्हें लिखने का आदेश दे दिया था। अतः अब क़यामत तक इस दुनिया में जो कुछ होगा, वह उसी लिखी हुई तक़दीर केअनुसार होगा।
हवाला
سنن أبي داود - سليمان بن الأشعث السِّجِسْتاني تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد: المكتبة العصرية، صيدا - بيروت.
سنن الترمذي - محمد بن عيسى ، الترمذي، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر ومحمد فؤاد عبد الباقي وإبراهيم عطوة عوض -شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي - مصر - الطبعة: الثانية، 1395 هـ - 1975 م.
مسند الإمام أحمد بن حنبل المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي مؤسسة الرسالة الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م.
- الجديد في شرح كتاب التوحيد- محمد بن عبد العزيز السليمان القرعاوي- دارسة وتحقيق: محمد بن أحمد سيد أحمد- مكتبة السوادي، جدة، المملكة العربية السعودية- الطبعة: الخامسة، 1424هـ/2003م.
- الملخص في شرح كتاب التوحيد- صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان - دار العاصمة الرياض - الطبعة: الأولى 1422هـ- 2001م.
- القول المفيد على كتاب التوحيد- محمد بن صالح بن محمد العثيمين - دار ابن الجوزي، المملكة العربية السعودية- الطبعة: الثانية, محرم 1424هـ.
- القدر وما ورد في ذلك من الآثار: عبد الله بن وهب المصري - المحقق: د. عبد العزيز عبد الرحمن العثيم -دار السلطان - مكة المكرمة الطبعة: الأولى، 1406 هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «احتجَّ آدمُ وموسى، فقال له موسى: يا آدمُ أنت أبونا خَيَّبتنا وأخرجتَنا من الجنة، قال له آدمُ: يا موسى اصطفاك اللهُ بكلامِه، وخطَّ لك بيدِه، أتلومُني على أمرٍ قَدَّره اللهُ عليَّ قبل أنْ يخلُقَني بأربعين سنةً؟ فحَجَّ آدمُ موسى، فحَجَّ آدمُ موسى».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “आदम तथा मूसा (अलैहिमस्सलाम) के बीच तर्क-वितर्क हो गया। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने आदम (अलैहिस्सलाम) से कहा : ऐ आदम! आप हमारे पिता हैं। आपने ही हमें असफ़ल किया तथा जन्नत से निकाला। आदम (अलैहिस्सलाम) ने उनसे कहा : ऐ मूसा! अल्लाह ने तुझे स्वयं अपने से बात करने के लिए चुना और अपने हाथों से तुम्हारे लिए तौरात लिखी। क्या तुम मुझे एक ऐसी बात पर दोष दे रहे हो, जिसे अल्लाह ने मुझे बनाने से चालीस साल पूर्व ही लिख दिया था? इस प्रकार, आदम (अलैहिस्सलाम) ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को परास्त कर दिया।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه.
صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
شرح صحيح البخاري لابن بطال، تحقيق: أبي تميم ياسر بن إبراهيم، نشر: مكتبة الرشد، الرياض-السعودية، الطبعة: الثانية 1423ه، 2003م.
عمدة القاري شرح صحيح البخاري، لمحمود بن أحمد بن موسى الحنفى بدر الدين العينى، الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، للنووي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت، الطبعة: الثانية، 1392ه.
شرح كتاب التوحيد من صحيح البخاري، لعبد الله بن محمد الغنيمان، الناشر: مكتبة الدار، المدينة المنورة، الطبعة: الأولى، 1405 هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن علي رضي الله عنه قال: كُنَّا في جَنَازة في بَقِيعِ الغَرْقَدِ، فَأتَانَا رسول الله صلى الله عليه وسلم فَقَعَدَ، وَقَعَدْنَا حَوْلَه ومعه مِخْصَرَةٌ فَنَكَّسَ وجعل يَنْكُتُ بِمِخْصَرَتِهِ، ثم قال: «ما مِنْكُمْ من أحَدٍ إلا وقد كُتِبَ مَقْعَدُه من النَّار ومَقْعَدُه من الجنَّة» فقالوا: يا رسول الله، أفلا نَتَّكِلُ على كِتَابِنَا؟ فقال: «اعملوا؛ فَكلٌّ مُيَسَّرٌ لما خُلِقَ له...» وذكر تمام الحديث.
अली (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम लोग बक़ी-ए- ग़रक़द में एक जनाज़े में थे, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे पास आए और बैठ गए और हम लोग भी आपके आस- पास बैठ गए। उस समय आपके हाथ में एक छड़ी थी। आप अपना सर झुकाए उससे मिट्टी को खुरचने लगे, फिर फ़रमाया: तुममें से प्रत्येक व्यक्ति का जहन्नम अथवा जन्नत में ठिकाना लिख दिया गया है। लोगों ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! तब हम अपने भाग्य पर निर्भर क्यों न कर लें? आपने फ़रमाया: अमल (कर्म) करते रहो, क्योंकि जिसके लिए जो पैदा किया गया है, वही उसके लिए सरल कर दिया जाता है। इसके बाद पूरी हदीस बयान की गई है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथीगण उनमें से किसी के जनाज़े में मदीने वालों की क़ब्रिस्तान में उपस्थित थे। आप भी उनके बीच बैठ गए। उस समय आपके हाथ में एक छड़ी थी। अपना सर धरती की ओर झुका लिया और छड़ी से धरती को खुरचने लगे। ऐसा मालूम हो रहा था कि कुछ सोच रहे हैं और चिंतित हैं। फिर फ़रमाया कि अल्लाह ने लोगों के भाग्य लिख रखे हैं और जन्नत एवं जहन्नम में उनका ठिकाना भी लिख रखा है।
जब सहाबा -रज़ियल्लाहु अनहुम- ने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की यह बात सुनी, तो कहने लगे कि जब सारे निर्णय पहले ही हो चुके हैं और यह तय हो चुका है कि जो अभागा है वह अभागा ही रहेगा और जो भाग्यशाली है वह भाग्यशाली ही रहेगा, इसी तरह जिसे जन्नत जाना है वह जन्नत ही जाएगा और जिसे जहन्नम जाना है वह जहन्नम ही जाएगा, तो क्या हम कर्म करना छोड़ न दें? क्योंकि कर्म का कोई फ़ायदा तो है नहीं! हर चीज़ लिखी हुई और निश्चित है!
सहाबा की इन बातों का उत्तर देते हुए आपने कहा कि तुम कर्म करते रहो और भाग्य में लिखी भलाई एवं बुराई पर भरोसा करके बैठ न जाओ। तुम्हें जिन बातों का आदेश दिया गया है, उनका पालन करते रहो और जिन कामों से रोका गया है, उनसे रुक जाओ। क्योंकि जन्नत भी कर्म से प्राप्त होती है और जहन्नम भी कर्म से प्राप्त होती है। जन्नत में प्रवेश का सौभाग्य उसी को प्राप्त होगा, जिसने जन्नत जाने योग्य कर्म किए होंगे और जहन्नम में प्रवेश की पीड़ा भी उसी को झेलनी पड़ेगी, जिसने जहन्नम की ओर ले जाने वाले कर्म किए होंगे। हर व्यक्ति के लिए वही आसान कर दिया जाता है, जिसके लिए उसे पैदा किया गया है। भलाई हो कि बुराई। जो भाग्यशाली होगा, अल्लाह उसके लिए भाग्यशाली लोगों का कर्म आसान करे देगा और जो भाग्यहीन होगा अल्लाह उसके लिए भाग्यहीन लोगों का कर्म आसान कर देगा।
हवाला
نزهة المتقين، تأليف: مصطفى الخن وآخرون، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397هـ الطبعة الرابعة عشر 1407هـ.
كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430هـ.
بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م.
صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل، الطبعة: الأولى، 1428هـ.
صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ.
دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي، نسخة الكترونية، لا يوجد بها بيانات نشر.
شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426هـ.
شرح الطيبي على مشكاة المصابيح، تأليف: شرف الدين الحسين بن عبد الله الطيبي، تحقيق: د. عبد الحميد هنداوي، الناشر: مكتبة نزار مصطفى الباز، مكة المكرمة، الرياض، الطبعة الأولى، 1417 هـ - 1997م.
مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، تأليف: علي بن سلطان القاري، الناشر: دار الفكر، الطبعة: الأولى، 1422هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبد الله بن جعفر رضي الله عنهما : أن النبي صلى الله عليه وسلم أمهل آل جعفر ثلاثا، ثم أتاهم، فقال: «لا تبكوا على أخي بعد اليوم» ثم قال: «ادعوا لي بني أخي» فجيء بنا كأننا أفْرُخٌ فقال: «ادعوا لي الحلاق» فأمره، فحلق رؤوسنا».
अब्दुल्लाह बिन जाफ़र (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने जाफ़र के परिवार को तीन दिन की छूट दी। फिर आप आए और फ़रमाया: आज के बाद मेरे भाई पर रोया न करो। फिर फ़रमाया: मेरे भतीजों को बुलाओ। अतः हमें लाया गया। उस समय हम ऐसे लग रहे थे जैसे हम चूज़े हों। फिर आपने फ़रमाया: नाई को बुलाओ। फिर आपने नाई को आदेश दिया तो उसने हमारे सिर मूँड दिए।
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ
بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م
سنن أبي داود، تأليف: سليمان بن الأشعث السِّجِسْتاني، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، الناشر: المكتبة العصرية، صيدا.
السنن الكبرى، تأليف: أحمد بن شعيب النسائي، تحقيق: حسن عبد المنعم شلبي، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421 هـ
رياض الصالحين، تأليف : محيي الدين يحيى بن شرف النووي ، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428 هـ
شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426 هـ
عون المعبود شرح سنن أبي داود، تأليف: محمد شمس الحق العظيم آبادي، الناشر: دار الكتب العلمية، الطبعة: الثانية، 1415 هـ
مسند الإمام أحمد بن حنبل-المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون-إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي
الناشر: مؤسسة الرسالة-الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م
مشكاة المصابيح، تأليف: محمد بن عبد الله، التبريزي، تحقيق : محمد ناصر الدين الألباني، الناشر: المكتب الإسلامي، الطبعة: الثالثة، 1985م
شرح سنن أبي داود، تأليف: عبد المحسن بن حمد بن عبد المحسن العباد، نسخة الإلكترونية.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن النعمان بن بشير رضي الله عنهما قال: أُغْمِي على عبد الله بن رواحة رضي الله عنه فجعلت أُخْتُه تبكي، وتقول: واجَبَلاهُ، واكذا، واكذا: تُعَدِّدُ عليه. فقال حين أفَاق: ما قُلْتِ شيئا إلا قِيل لي أنت كذلك؟
नूमान बिन बशीर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि अब्दुल्लाह बिन रवाह़ा (रज़ियल्लाहु अनहु) बेहोश हुए तो उनकी बहन रो रो कर हे पहाड़! आदि बार- बार कहने लगी, तो होश में आने के बाद फ़रमाया: तुमने जो कुछ कहा, मुझसे कहा गया कि क्या तू ऐसा ही है?
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ.
- كنوز رياض الصالحين،لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه.
- شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.
- فتح الباري شرح صحيح البخاري- أحمد بن علي بن حجر العسقلاني الشافعي- دار المعرفة - بيروت،رقم كتبه وأبوابه وأحاديثه: محمد فؤاد عبد الباقي- قام بإخراجه وصححه وأشرف على طبعه: محب الدين الخطيب- عليه تعليقات العلامة: عبد العزيز بن عبد الله بن باز.
- عمدة القاري شرح صحيح البخاري/بدر الدين العينى -دار إحياء التراث العربي – بيروت-بدون تاريخ.
- دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين؛ لمحمد بن علان الشافعي،تحقيق خليل مأمون شيحا-دار المعرفة-بيروت-الطبعة الرابعة1425ه.
- بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه
- نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبد الله بن عمرو رضي الله عنهما قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «إنَّ اللهَ عزَّ وجلَّ خلق خَلْقَه في ظُلْمة، فألقى عليهم من نوره، فمَن أصابه مِن ذلك النور اهتدى، ومَن أخطأه ضلَّ»، فلذلك أقول: جَفَّ القلم على علم الله.
अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है: सर्वशक्तिमान अल्लाह ने सृष्टियों की रचना अंधेरे में की और उनके ऊपर अपना कुछ प्रकाश डाला। अतः, जिसे उस नूर का कुछ अंश प्राप्त हुआ, उसे सीधा मार्ग मिल गया और जिसे प्राप्त न हो सका, वह भटक गया। इसी लिए मैं कहता हूँ: क़लम अल्लाह के ज्ञान पर सूख गई है।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
سنن الترمذي، نشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي – مصر، الطبعة: الثانية، 1395هـ - 1975م.
مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421هـ - 2001م.
صحيح الجامع الصغير وزياداته، للألباني، نشر: المكتب الإسلامي.
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي- أبو العلا محمد عبد الرحمن المباركفورى -الناشر: دار الكتب العلمية - بيروت.
فقه الأسماء الحسنى -عبد الرزاق العباد -دارالتوحيد -الرياض.
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ: حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ الصَّادِقُ المَصْدُوقُ: «أَنَّ خَلْقَ أَحَدِكُمْ يُجْمَعُ فِي بَطْنِ أُمِّهِ أَرْبَعِينَ يَوْمًا وَأَرْبَعِينَ لَيْلَةً، ثُمَّ يَكُونُ عَلَقَةً مِثْلَهُ، ثُمَّ يَكُونُ مُضْغَةً مِثْلَهُ، ثُمَّ يُبْعَثُ إِلَيْهِ المَلَكُ، فَيُؤْذَنُ بِأَرْبَعِ كَلِمَاتٍ، فَيَكْتُبُ: رِزْقَهُ وَأَجَلَهُ وَعَمَلَهُ وَشَقِيٌّ أَمْ سَعِيدٌ، ثُمَّ يَنْفُخُ فِيهِ الرُّوحَ، فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الجَنَّةِ حَتَّى لاَ يَكُونُ بَيْنَهَا وَبَيْنَهُ إِلَّا ذِرَاعٌ، فَيَسْبِقُ عَلَيْهِ الكِتَابُ، فَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ فَيَدْخُلُ النَّارَ، وَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ حَتَّى مَا يَكُونُ بَيْنَهَا وَبَيْنَهُ إِلَّا ذِرَاعٌ، فَيَسْبِقُ عَلَيْهِ الكِتَابُ، فَيَعْمَلُ عَمَلَ أَهْلِ الجَنَّةِ فَيَدْخُلُهَا».
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है : "हमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने, जो कि सच्चे थे और जिनकी सच्चाई सर्वमान्य थी, बताया है : तुममें से हर व्यक्ति की सृष्टि-सामग्री उसकी माँ के पेट में चालीस दिनों वीर्य के रूप में एकत्र की जाती है। फिर इतने ही समय में वह जमे हुए रक्त का रूप धारण कर लेती है। फिर इतने ही दिनों में मांस का लौथड़ा बन जाती है। फिर उसकी ओर एक फ़रिश्ता भेजा जाता है, जिसे चार बातों का आदेश दिया जाता है। उसे कहा जाता है कि उसकी रोज़ी (जीविका), उसकी आयु, उसके कर्म तथा उसके अच्छे या बुरे होने को लिख दे। फिर वह उसमें रूह (जान) फूँक देता है। देखो, तुममें से कोई जन्नतियों के काम करता रहता है, यहाँ तक कि उसके और जन्नत के बीच केवल एक हाथ की दूरी रह जाती है कि इतने में उसपर तक़दीर का लिखा ग़ालिब आ जाता है और वह जहन्नमियों के काम करने लगता है तथा उसमें प्रवेश कर जाता है। इसी तरह, तुममें से कोई जहन्नमियों के काम करता रहता है, यहाँ तक उसके और जहन्नम के बीच केवल एक हाथ की दूरी रह जाती है कि इतने में उसपर उसपर तक़दीर का लिखा ग़ालिब आ जाता है और वह जन्नतियों के काम करने लगता है तथा जन्नत में प्रवेश कर जाता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अब्दुल्लाह बिन मसऊद कहते हैं कि हमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है, जिनकी हर बात सच्ची है और जिनको अल्लाह तआला ने सच्चा कहा है। आपने फ़रमाया : तुममें से हर व्यक्ति की सृष्टि-समाग्री एकत्र की जाती है। यानी जब कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ संभोग करता है, तो उसका बिखरा हुआ वीर्य औरत के गर्भाशय में चालीस दिनों तक वीर्य के रूप में एकत्र किया जाता है। फिर वह खून का लौथड़ा यानी गाढ़ा रक्त बन जाता है। यह काम दूसरे चालीस दिनों में होता है। फिर वह मांस का एक टुकड़ा बन जाता है, जिसे एक बार में चबाया जा सके। यह तीसरे चालीस दिनों में होता है। फिर उसकी ओर अल्लाह एक फ़रिश्ता भेजता है, जो उसमें तीसरे चालीस दिन समाप्त होने के बाद रूह (जान) फूँकता है। फ़रिश्ते को आदेश दिया जाता है कि चार बातें लिख दें। पहली बात उसकी रोज़ी (जीविका) है। यानी यह लिख दे कि उसे जीवन में कितनी सुख-सुविधाएँ प्राप्त होंगी। दूसरी बात उसकी आयु है। यानी यह लिख दे कि वह दुनिया में कितने दिन जीवित रहेगा। तरीसरी बात उसके कर्म हैं। यानी अच्छा काम करने वाला होगा यह बुरा। जबकि चौथी बात यह कि वह सौभाग्यशाली होगा या दुर्भाग्यशाली? फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़सम खाकर बताया कि एक व्यक्ति जन्नतियों के काम करता रहता है और उसके काम लोगों को अच्छे दिखाई पड़ते हैं, यहाँ तक कि उसके तथा जन्नत तक पहुँचने के बीच बस इतनी दूरी रह जाती है, जैसे किसी व्यक्ति और उसके गनतव्य के बीच केवल एक हाथ की दूरी रह गई हो, ऐसे समय में उसपर अल्लाह का लिखा और उसका निर्णय ग़ालिब आ जाता है और वह जहन्नमियों के काम करने लगता है और बुरे काम पर अंत होने की वजह से उसे जहन्नम जाना पड़ता है। क्योंकि अमल क़बूल होने के लिए शर्त यह है कि इन्सान उसपर क़ायम रहे और उसके स्थान पर बुरा करने न लगे। जबकि दूसरी ओर एक व्यक्ति जहन्नमियों के काम करता रहता है, यहाँ तक कि उसमें दाख़िल होने के निकट पहुँच जाता है, मानो कि उसके तथा जहन्नम के बीच केवल एक हाथ की दूरी रह गई हो, इतने में उसपर अल्लाह का लिखा और उसका निर्णय ग़ालिब आ जाता है और वह जहन्नतियों के काम करना शुरू कर देता है और फलस्वरूप जन्नत में प्रवेश करता है।
फ़ायदे
- इन्सान का अंजाम अंत में जाकर वही करता है, जो तक़दीर में लिखा हो।
- इसमें ज़ाहिरी आमाल के धोखे में आने से मना किया गया है। क्योंकि आमाल का दारोमदार (निर्भरता) अंत पर होता है।
हवाला
صحيح البخاري (9/ 135) (7454)، (4/ 111) (3208)، صحيح مسلم (4/ 2036) (2643)، عمدة القاري شرح صحيح البخاري (15/ 130)، شرح الأربعين النووية للعثيمين (ص: 84).
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